Wednesday, 13 November 2013

Tumhe khuda banake ek dua taraash ki hai
jo kubool nahi ho, ye sazaa muraad ki hai
mayaar se gire to youn  jaan nisaar ki hai

khud se juda, tumse juda, bas talaash ki hai...

Tuesday, 8 October 2013

गर्द की लाखों तहों के बीच अटकी फाँस है
ज़िन्दगी के दायरों मैं सच कहाँ, बस सांस है

ख्वाब की हर शायरी को दाद की किस्मत नहीं
कुछ धुंआ भर भी उठे तो नश्तर ऐ एहसास है

रंग की फितरत को क्योँ कर लानतें भेजा करें
तस्वीर का रुख ही जहाँ हर रूह की रुदाद है

यूँ अगरचे इश्क से भरपा गए हम भी सनम
और कुछ लम्हे वफ़ा की हिचकियों में आंच है

Thursday, 12 September 2013

ishq ke saath basar rooh main katra katra
zinda hi aap iss dozakh main jal jaate hain

Wednesday, 4 September 2013

Allah..

दिल की जुम्बिश दूरियों की सिलवटों मैं कैद है
आँख से टपके लहू, फिर भी वो सफ़ेद है

एक वफ़ा के क़र्ज़ को आखिर कभी पुरसी मिले
दर्द सारा जो बटोरा, कैसे सहूँ, फरेब है

भूल कर ईमान दुनिया, एक पनाह की जुस्तुजू 
क्या दुआ मांगे कोई, अल्लाह, तू ही नेक है

Thursday, 25 April 2013

Kabhi

वक़्त की सुराही से लम्हे
धीरे धीरे रीत रहे हैं--
अटक अटक कर, ठिठक ठिठक कर।
एक सोता फूट कर उभरे अगर...
ये तरसते लम्हे जी भर
भीग तो जाएँ...
वक़्त की तह में दबाकर रोंदते जिसको रहे 
उस दिल की ये जुर्रत- उठे और मुझसे कहे-
सच कहीं कुछ भी नहीं, धडकनों मैं कैद है 
आरज़ू मैं आशना और पुतलियों मैं ज़ेब है. 
जब तलक है साँस, मुझमें आस बाकी है कहीं 
रूह मैं जिंदा रहूँ, ये प्यास बाकी है कहीं ..
तुम मेरे एहसास मैं कैद होकर भी नहीं
और इज़ाज़त हो अगर जाने की,
तो क्या रुक जाओगे?

केंचुले उतरी कई मेरी मगर तुम न गए
रूह की हर एक नस
निचोडू तो क्या छट जाओगे?

पूछ लूँ तुम से ही क्या है इस नशे की इन्तहा..
और अगर उतरे नहीं ताउम्र
तो क्या शरमाओगे?

तुम नहीं बदलोगे इसका है यकीन मुझको मगर
प्यार करने की सजा मे
प्यार तो कर पाओगे?